Sunday, September 20, 2009

तेरी नींद के लिए लुटाने पड़े
सपने मेरे ख़ज़ाने से तो सौदा बुरा नहीँ
तेरी आँखों की चमक के लिए लेनी पड़े
रोशनी उधार सूरज से तो भी सौदा बुरा नही
तेरी एक हँसी के लिए थामे रखने पड़े
आँसू अपनी आँखों मे तो भी सौदा बुरा नहीं!

Friday, September 4, 2009

तुमसे मिलने

आऊँगी मैं तुमसे मिलने
लाँघकर चीन की दीवार
तैर कर हिंद महसागर
पार कर अफ्रीका के जंगल भी
चढ़ कर एवरेस्ट की छोटी
उड़ कर आकाश में भी
नही झिझकुंगी एक बार भी
बनाने कबूतर को संदेशवाहक
या उल्लू को पथ प्रदर्शक में
मैं चिड़िया के पँखो पर हो सवार
आकाश पार कर तुमसे मिलने आऊँगी
मैं डाल्फिन पर बैठकर
सागर की गहराइयों को पार कर तुमसे मिलने आऊँगी
मैं जुगनू को साथ लेकर
अंधेरी रात में तुमसे मिलने आऊँगी !

Tuesday, May 12, 2009

माँ

माँ 

दिया तुमने मुझे वरदान जीवन का 
दी तुमने ही मुझे ये हसीन ज़िंदगी 
आई मैं इस दुनिया में तुम्हारा दामन थामकर 
सीखा है चलना मैने तुम्हारी उंगली पकड़कर 
खोली जब आँखे मैने तुम्हे ही देखा था पहली बार 
मेरी एक हँसी पर तुम वारी जाती थी 
मेरे एक आँसू पर तुम घबरा सी जाती थी 
मेरी एक छींक पर तुमने सारी रात जागकर काटी
मेरी एक ज़िद पर तुम दुनिया सारी ला देती 
माँ ही बोला था मैने जीवन का पहला शब्द 
तब तुम्हारी आँखो में एक चमक सी आई थी! 

माँ 
दिया तुमने मुझे वरदान जीवन का 
दी तुमने ही मुझे ये हसीन ज़िंदगी 
खेलती है होंठो पर मेरे तुम्हारी ही मुस्कान 
वाणी से मेरी निकलते हैं तुम्हारे ही सुर
झलकती है चेहरे से तुम्हारी सी आभा 
धैर्य है मुझमे तुम्हारे ही जैसा 
घटा है कशों मे मेरे तुम्हारे जैसी 
हृदय में है मेरे तुम्हारे जैसा प्यार 
बातों में है मेरे तुम्हारी जैसी शुचिता 
संस्कार है मुझमे तुम्हारे ही दिए हुए 
लय है ज़िंदगी में तुम्हारे जैसी. 

माँ 
दिया तुमने मुझे वरदान जीवन का 
दी तुमने ही मुझे ये हसीन ज़िंदगी!

Monday, April 20, 2009

इंतज़ार

थी मैं कितनी अधीर
तुमसे मिलने से पहले
इंतज़ार मुझे काटने को दौड़ता था
एक एक पल सदियों पुराना लगता था
हँसती थी मैं उन पर
जो इंतज़ार की राह में बैठे होते थे
और कहती थी
इंतज़ार से बड़ा पागलपना और क्या होगा एस दुनिया में?
पर तुमसे मिलने के बाद
पहली बार लगा
इंतज़ार का मज़ा ही कुछ और है
ना दिन, ना हफ्ते, ना महीने
बल्कि कई सालों तक किया जा सकता है इंतज़ार
आज बरसों बीत गये
मुझे तुम्हारा इंतज़ार करते हुए
पर तुम भी तक नही आए
ना ही तुम्हारी कोई खबर आयी
पर फिर भी हूँ मैं
बैठी इंतज़ार की राह में
और आज गुज़रता हुआ एक शख़्स बोला
इंतज़ार से बड़ा पागलपना और क्या होगा एस दुनिया में
और हंसकर मेरे करीब से गुज़र गया!

Friday, December 12, 2008

अलगनी में सुखाये थे कुछ ख्वाब धूप में मैंने,
बोलो सूरज क्या तुमने देखे हैं?
बुने थे कुछ सपने मैंने दिन ढले,
क्या चाँद तुमने ओढे हैं?
तह कर अलमारी में सजाया मैंने तब भी
चोरी हुए सब ख्वाब मेरे ,
तब मैंने ख्वाबो का एक कमरा बनाया
पर लगता है उसमे भी कोई आया
गुमसुम क्यूँ हो रोशनदान कहीं तुमने तो नहीं चुराए सब ख्वाब मेरे!

Monday, November 24, 2008

ये आलम इश्क का है,
न खबर किसी और बात की है
आया था खुदा भी सामने एक दिन
पर हमें फुरसत कहाँ थी!

Thursday, November 20, 2008

अच्छा हुआ मुझे प्यार नही हुआ!

अच्छा हुआ मुझे प्यार नही हुआ,
वरना देखने पड़ते
कितने टूटे हुए ख्वाब
जो मेरे लिए ही बुने गये थे
और चुभती जिनकी किरचे भी
मेरे ही दिल मे.

अच्छा हुआ मुझे प्यार नही हुआ
वरना ना जाने
कितने चेहरे हो जाते उदास
जो मुझे देखकर खिल उठते थे
और उनसे छलनी हो जाता
मेरा ही हर्दय.

अच्छा हुआ मुझे प्यार नही हुआ
वरना ना जाने कितनी ही बातें बनती
व्यंग्य भी कसे जाते मुझ पर
और पहली बार
मुझे सबकुछ चुप चाप सहना पड़ता.

अच्छा हुआ मुझे प्यार नही हुआ
वरना देखनी पड़ती
कितनी ही तिरछी नज़रें
अपने ही प्रियजनो की
और सहना पड़ता
मुझे अपनो की प्रताड़ना को.

अच्छा हुआ मुझे प्यार नही हुआ
वरना मैं कर देती विश्वासघात
अपने ही घरवालों से
जो मेरे अपने थे
और उमर भर के लिए
मैं हो जाती सबसे पराई

और सब तो अच्छा ही हुआ
पर सबसे बुरा हुआ है ये
ना जाने कितने ही अफ़साने
बनने से पहले ही बिगड़ गये!